यह ब्लॉग पोस्ट भारत के प्रमुख बंदरगाहों (Major Ports of India) के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करता है। भारत की विशाल समुद्री तटरेखा लगभग 7,516.6 किलोमीटर लंबी है, जो इसे वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है।
भारत के प्रमुख बंदरगाह: एक विस्तृत गाइड (Major Ports of India)
भारत में वर्तमान में 13 प्रमुख बंदरगाह (Major Ports) हैं और लगभग 200 मध्यम व छोटे बंदरगाह हैं। प्रमुख बंदरगाहों का प्रबंधन केंद्र सरकार के 'पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय' द्वारा किया जाता है, जबकि छोटे बंदरगाहों की देखरेख संबंधित राज्य सरकारें करती हैं।
भारत के बंदरगाहों को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है:
पश्चिमी तट के बंदरगाह (Western Coast Ports)
पूर्वी तट के बंदरगाह (Eastern Coast Ports)
पश्चिमी तट के बंदरगाह (Western Coast Ports)
पूर्वी तट के बंदरगाह (Eastern Coast Ports)
1. पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाह (Western Coast Ports)
भारत के पश्चिमी तट के बंदरगाह ऐतिहासिक और व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये बंदरगाह न केवल अरब सागर के माध्यम से खाड़ी देशों और यूरोप से जुड़े हैं, बल्कि भारत के आयात-निर्यात का एक बड़ा हिस्सा भी संभालते हैं।
नीचे पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाहों का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. कांडला बंदरगाह (दीनदयाल पोर्ट) - गुजरात
स्थान: गुजरात के कच्छ की खाड़ी में स्थित।
इतिहास: 1947 में विभाजन के बाद जब कराची बंदरगाह पाकिस्तान के पास चला गया, तब उत्तर-पश्चिम भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए कांडला को विकसित किया गया।
विशेषता: यह एक ज्वारीय बंदरगाह (Tidal Port) है। यहाँ एक 'मुक्त व्यापार क्षेत्र' (Free Trade Zone) भी है।
व्यापार: यहाँ मुख्य रूप से कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, उर्वरक और अनाज का आयात-निर्यात होता है।
स्थान: गुजरात के कच्छ की खाड़ी में स्थित।
इतिहास: 1947 में विभाजन के बाद जब कराची बंदरगाह पाकिस्तान के पास चला गया, तब उत्तर-पश्चिम भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए कांडला को विकसित किया गया।
विशेषता: यह एक ज्वारीय बंदरगाह (Tidal Port) है। यहाँ एक 'मुक्त व्यापार क्षेत्र' (Free Trade Zone) भी है।
व्यापार: यहाँ मुख्य रूप से कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, उर्वरक और अनाज का आयात-निर्यात होता है।
2. मुंबई बंदरगाह - महाराष्ट्र
स्थान: महाराष्ट्र के कोंकण तट पर।
विशेषता: यह भारत का सबसे बड़ा प्राकृतिक बंदरगाह है। यह आकार और यातायात की दृष्टि से भारत का सबसे व्यस्त बंदरगाह भी है।
संरचना: इसमें तीन प्रमुख गोदी (Docks) हैं - अलेक्जेंड्रा, विक्टोरिया और प्रिंस डॉक।
महत्व: स्वेज नहर मार्ग के करीब होने के कारण यह पश्चिमी देशों के साथ व्यापार के लिए अत्यंत सुविधाजनक है।
स्थान: महाराष्ट्र के कोंकण तट पर।
विशेषता: यह भारत का सबसे बड़ा प्राकृतिक बंदरगाह है। यह आकार और यातायात की दृष्टि से भारत का सबसे व्यस्त बंदरगाह भी है।
संरचना: इसमें तीन प्रमुख गोदी (Docks) हैं - अलेक्जेंड्रा, विक्टोरिया और प्रिंस डॉक।
महत्व: स्वेज नहर मार्ग के करीब होने के कारण यह पश्चिमी देशों के साथ व्यापार के लिए अत्यंत सुविधाजनक है।
3. जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) - महाराष्ट्र
स्थान: नवी मुंबई (न्हावा शेवा)।
उद्देश्य: मुंबई बंदरगाह पर भीड़ और दबाव को कम करने के लिए इसका निर्माण किया गया था।
विशेषता: यह भारत का सबसे बड़ा और आधुनिक कंटेनर पोर्ट (Container Port) है। यह पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत और मशीनीकृत है।
स्थान: नवी मुंबई (न्हावा शेवा)।
उद्देश्य: मुंबई बंदरगाह पर भीड़ और दबाव को कम करने के लिए इसका निर्माण किया गया था।
विशेषता: यह भारत का सबसे बड़ा और आधुनिक कंटेनर पोर्ट (Container Port) है। यह पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत और मशीनीकृत है।
4. मोरमुगाओ बंदरगाह - गोवा
स्थान: गोवा में जुआरी नदी के मुहाने (Estuary) पर स्थित।
विशेषता: यह एक प्राकृतिक बंदरगाह है।
मुख्य व्यापार: यह बंदरगाह मुख्य रूप से लौह अयस्क (Iron Ore) के निर्यात के लिए प्रसिद्ध है, जो मुख्य रूप से जापान और यूरोपीय देशों को भेजा जाता है।
स्थान: गोवा में जुआरी नदी के मुहाने (Estuary) पर स्थित।
विशेषता: यह एक प्राकृतिक बंदरगाह है।
मुख्य व्यापार: यह बंदरगाह मुख्य रूप से लौह अयस्क (Iron Ore) के निर्यात के लिए प्रसिद्ध है, जो मुख्य रूप से जापान और यूरोपीय देशों को भेजा जाता है।
5. न्यू मैंगलोर बंदरगाह - कर्नाटक
स्थान: कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में।
विशेषता: इसे 'कर्नाटक का प्रवेश द्वार' कहा जाता है।
व्यापार: कुद्रेमुख की खानों से निकलने वाले लौह अयस्क का सांद्रण (Concentrate) यहाँ से निर्यात किया जाता है। इसके अलावा ग्रेनाइट, काजू और कॉफी का भी व्यापार होता है।
स्थान: कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में।
विशेषता: इसे 'कर्नाटक का प्रवेश द्वार' कहा जाता है।
व्यापार: कुद्रेमुख की खानों से निकलने वाले लौह अयस्क का सांद्रण (Concentrate) यहाँ से निर्यात किया जाता है। इसके अलावा ग्रेनाइट, काजू और कॉफी का भी व्यापार होता है।
6. कोचीन बंदरगाह - केरल
स्थान: केरल के एर्नाकुलम जिले में वेम्बनाड झील के पास।
विशेषता: यह एक प्राकृतिक बंदरगाह है जो विलिंगडन द्वीप पर स्थित है। इसे "अरब सागर की रानी" के पास स्थित माना जाता है।
महत्व: यह मसालों, चाय और कॉफी के निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
स्थान: केरल के एर्नाकुलम जिले में वेम्बनाड झील के पास।
विशेषता: यह एक प्राकृतिक बंदरगाह है जो विलिंगडन द्वीप पर स्थित है। इसे "अरब सागर की रानी" के पास स्थित माना जाता है।
महत्व: यह मसालों, चाय और कॉफी के निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
2. पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाह (Eastern Coast Ports)
भारत का पूर्वी तट बंगाल की खाड़ी के समानांतर फैला हुआ है। पश्चिमी तट की तुलना में, पूर्वी तट अधिक कटा-फटा (Indented) है और यहाँ कई महत्वपूर्ण डेल्टा (जैसे गंगा, महानदी, कृष्णा और कावेरी) स्थित हैं।
पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाहों का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
1. कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह - पश्चिम बंगाल
स्थान: हुगली नदी के तट पर।
विशेषता: यह भारत का एकमात्र नदीय (Riverine) प्रमुख बंदरगाह है। समुद्र तट से अंदर होने के कारण यहाँ बड़े जहाजों के आने के लिए नदी की गहराई (Dredging) बनाए रखनी पड़ती है।
हल्दिया पोर्ट: कोलकाता बंदरगाह के भार को कम करने के लिए हल्दिया को एक सहायक बंदरगाह के रूप में विकसित किया गया है।
व्यापार: यहाँ से जूट (पटसन), चाय, कोयला और इस्पात का भारी मात्रा में निर्यात किया जाता है।
2. पारादीप बंदरगाह - ओडिशा
स्थान: ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में महानदी के मुहाने पर।
विशेषता: यह एक गहरे पानी वाला प्राकृतिक बंदरगाह है।
मुख्य व्यापार: इसका मुख्य उद्देश्य ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लौह अयस्क (Iron Ore) का निर्यात करना है। यहाँ से भारी मात्रा में कच्चा लोहा जापान को भेजा जाता है।
3. विशाखापत्तनम बंदरगाह - आंध्र प्रदेश
स्थान: आंध्र प्रदेश के तट पर।
विशेषता: यह भारत का सबसे गहरा (Deepest) और भूमि से घिरा (Land-locked) सुरक्षित बंदरगाह है।
सुरक्षा: यह बंदरगाह 'डॉल्फिन नोज' (Dolphin's Nose) नामक पहाड़ी के पीछे स्थित है, जो इसे मानसून और समुद्री तूफानों से सुरक्षा प्रदान करती है।
व्यापार: यहाँ जहाज निर्माण और मरम्मत की सुविधा भी उपलब्ध है।
4. एन्नोर बंदरगाह (कामराजार पोर्ट) - तमिलनाडु
स्थान: चेन्नई से लगभग 24 किमी उत्तर में।
विशेषता: यह भारत का पहला कॉर्पोरेट (Corporatized) बंदरगाह है, यानी यह सार्वजनिक कंपनी के रूप में पंजीकृत है।
उद्देश्य: इसे चेन्नई बंदरगाह की भीड़भाड़ को कम करने के लिए विकसित किया गया था। यहाँ मुख्य रूप से कोयले का आयात होता है।
5. चेन्नई बंदरगाह - तमिलनाडु
स्थान: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में।
विशेषता: यह भारत का सबसे पुराना कृत्रिम बंदरगाह (Artificial Port) है। मुंबई के बाद यह व्यापार की दृष्टि से भारत का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है।
व्यापार: यहाँ से ऑटोमोबाइल (कारें), पेट्रोलियम और उर्वरकों का बड़े पैमाने पर व्यापार होता है।
6. तूतीकोरिन बंदरगाह (V.O. Chidambaranar) - तमिलनाडु
स्थान: तमिलनाडु के दक्षिणी भाग में मन्नार की खाड़ी पर।
विशेषता: यह एक उथला (Shallow) बंदरगाह है, इसलिए बड़े जहाज तट से काफी दूर खड़े होते हैं।
व्यापार: यहाँ से श्रीलंका के साथ व्यापार सबसे अधिक होता है। यहाँ नमक, उर्वरक और खाद्य तेलों का व्यापार प्रमुख है।
3. अन्य महत्वपूर्ण बंदरगाह
पोर्ट ब्लेयर (अंडमान निकोबार): इसे 2010 में भारत का 13वां प्रमुख बंदरगाह घोषित किया गया था।
वधावन बंदरगाह (प्रस्तावित): महाराष्ट्र में एक नया 'मेगा पोर्ट' विकसित किया जा रहा है जो भारत के समुद्री व्यापार की क्षमता को दोगुना कर देगा।
पोर्ट ब्लेयर (अंडमान निकोबार): इसे 2010 में भारत का 13वां प्रमुख बंदरगाह घोषित किया गया था।
वधावन बंदरगाह (प्रस्तावित): महाराष्ट्र में एक नया 'मेगा पोर्ट' विकसित किया जा रहा है जो भारत के समुद्री व्यापार की क्षमता को दोगुना कर देगा।
1. पोर्ट ब्लेयर बंदरगाह (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह)
पोर्ट ब्लेयर को जून 2010 में भारत के 13वें प्रमुख बंदरगाह के रूप में मान्यता दी गई थी। यह रणनीतिक रूप से भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
रणनीतिक स्थिति: यह बंदरगाह बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के मिलन स्थल पर स्थित है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों (मलक्का जलडमरूमध्य) के करीब है।
कनेक्टिविटी: यह मुख्य रूप से मुख्य भूमि भारत (कोलकाता, चेन्नई और विशाखापत्तनम) के साथ द्वीपों के संपर्क का सूत्रधार है।
भविष्य की योजना: सरकार यहाँ ग्रेट निकोबार द्वीप में एक 'इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल' विकसित करने की योजना बना रही है, जो कोलंबो और सिंगापुर जैसे बंदरगाहों को टक्कर दे सकेगा।
रणनीतिक स्थिति: यह बंदरगाह बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के मिलन स्थल पर स्थित है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों (मलक्का जलडमरूमध्य) के करीब है।
कनेक्टिविटी: यह मुख्य रूप से मुख्य भूमि भारत (कोलकाता, चेन्नई और विशाखापत्तनम) के साथ द्वीपों के संपर्क का सूत्रधार है।
भविष्य की योजना: सरकार यहाँ ग्रेट निकोबार द्वीप में एक 'इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल' विकसित करने की योजना बना रही है, जो कोलंबो और सिंगापुर जैसे बंदरगाहों को टक्कर दे सकेगा।
2. वधावन बंदरगाह (Vadhvan Port) - महाराष्ट्र (प्रस्तावित)
यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी समुद्री परियोजनाओं में से एक है। इसे महाराष्ट्र के पालघर जिले में विकसित किया जा रहा है।
मेगा पोर्ट की क्षमता: वधावन को एक 'लैंडलॉर्ड मॉडल' पर विकसित किया जा रहा है। यह दुनिया के टॉप 10 बंदरगाहों में शामिल होने की क्षमता रखेगा।
गहराई (Draft): इसकी प्राकृतिक गहराई लगभग 20 मीटर होगी, जिससे दुनिया के सबसे बड़े जहाज (Ultra Large Container Vessels) यहाँ आसानी से लंगर डाल सकेंगे। वर्तमान में भारत के अधिकांश बंदरगाहों में इतनी गहराई नहीं है।
उद्देश्य: यह मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) के बोझ को साझा करेगा और भारत के पश्चिमी तट पर व्यापारिक क्षमता को दोगुना कर देगा।
मेगा पोर्ट की क्षमता: वधावन को एक 'लैंडलॉर्ड मॉडल' पर विकसित किया जा रहा है। यह दुनिया के टॉप 10 बंदरगाहों में शामिल होने की क्षमता रखेगा।
गहराई (Draft): इसकी प्राकृतिक गहराई लगभग 20 मीटर होगी, जिससे दुनिया के सबसे बड़े जहाज (Ultra Large Container Vessels) यहाँ आसानी से लंगर डाल सकेंगे। वर्तमान में भारत के अधिकांश बंदरगाहों में इतनी गहराई नहीं है।
उद्देश्य: यह मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) के बोझ को साझा करेगा और भारत के पश्चिमी तट पर व्यापारिक क्षमता को दोगुना कर देगा।
3. विझिंजम बंदरगाह (Vizhinjam Port) - केरल
हालाँकि यह एक प्रमुख सरकारी बंदरगाह (Major Port) के बजाय एक 'अडानी समूह' और केरल सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा पोर्ट है, लेकिन इसकी चर्चा के बिना भारत का पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर अधूरा है।
भारत का पहला ट्रांसशिपमेंट हब: यह भारत का पहला ऐसा बंदरगाह है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में डिजाइन किया गया है।
विशेषता: इसकी प्राकृतिक गहराई और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन से इसकी निकटता (मात्र 10 समुद्री मील) इसे वैश्विक व्यापार के लिए आदर्श बनाती है।
भारत का पहला ट्रांसशिपमेंट हब: यह भारत का पहला ऐसा बंदरगाह है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में डिजाइन किया गया है।
विशेषता: इसकी प्राकृतिक गहराई और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन से इसकी निकटता (मात्र 10 समुद्री मील) इसे वैश्विक व्यापार के लिए आदर्श बनाती है।
भारत में बंदरगाहों का प्रशासन और विकास
भारत में बंदरगाहों के विकास को गति देने के लिए सरकार ने दो महत्वपूर्ण स्तंभ तैयार किए हैं:
A. सागरमाला परियोजना (Sagarmala Project)
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बंदरगाहों के नेतृत्व में विकास (Port-led development) को बढ़ावा देना है। इसके चार प्रमुख हिस्से हैं:
बंदरगाह आधुनिकीकरण: पुराने बंदरगाहों को नई तकनीक से लैस करना।
पोर्ट कनेक्टिविटी: बंदरगाहों को रेलवे और हाईवे से जोड़ना।
पोर्ट-लिंक्ड औद्योगिकीकरण: बंदरगाहों के पास ही उद्योगों को विकसित करना ताकि परिवहन लागत कम हो।
तटीय सामुदायिक विकास: मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कौशल विकास।
बंदरगाह आधुनिकीकरण: पुराने बंदरगाहों को नई तकनीक से लैस करना।
पोर्ट कनेक्टिविटी: बंदरगाहों को रेलवे और हाईवे से जोड़ना।
पोर्ट-लिंक्ड औद्योगिकीकरण: बंदरगाहों के पास ही उद्योगों को विकसित करना ताकि परिवहन लागत कम हो।
तटीय सामुदायिक विकास: मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कौशल विकास।
