O Level Course क्या है? पूरी जानकारी हिंदी में (2026 Edition)
आज के डिजिटल युग में, कंप्यूटर साक्षरता केवल एक कौशल नहीं बल्कि एक ज़रूरत बन गई है। जब बात सरकारी नौकरी या आईटी सेक्टर में करियर शुरू करने की आती है, तो NIELIT O Level Certificate का नाम सबसे पहले आता है।
1. O Level कोर्स क्या है? (What is O Level Course?)
O Level (Ordinary Level) एक साल का फाउंडेशन कोर्स है, जिसे NIELIT (National Institute of
Electronics and Information Technology) द्वारा आयोजित किया जाता है। यह कोर्स सूचना प्रौद्योगिकी (Information
Technology) के क्षेत्र में बुनियादी ज्ञान प्रदान करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: यह कोर्स भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आता है और इसे NSQF Level 4 के समकक्ष माना गया है।
O Level कोर्स के बारे में और गहराई से समझना चाहते हैं?
चलिए, इसे बहुत ही सरल भाषा में विस्तार से समझते हैं।
O Level (Ordinary Level) कोर्स एक प्रोफेशनल कंप्यूटर सर्टिफिकेट प्रोग्राम है। इसे भारत सरकार की संस्था NIELIT
(National Institute of Electronics and Information Technology) द्वारा संचालित किया जाता है। पहले इस संस्था को DOEACC के नाम से जाना जाता था।
इसे आप कंप्यूटर एप्लीकेशन में एक फाउंडेशन कोर्स मान सकते हैं,
जो आपको आईटी (Information
Technology) की दुनिया के लिए तैयार करता है।
1. यह किसके लिए है?
यह कोर्स उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जो:
- सरकारी नौकरी
(जैसे UPPSC, RO/ARO, Police, SSC) की तैयारी कर रहे हैं, जहाँ कंप्यूटर सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है।
- प्राइवेट सेक्टर
में कंप्यूटर ऑपरेटर या वेब डिजाइनर के रूप में करियर शुरू करना चाहते हैं।
- कंप्यूटर की गहरी समझ (हार्डवेयर से लेकर प्रोग्रामिंग तक) हासिल करना चाहते हैं।
2. कोर्स का स्तर (Equivalence)
भारत सरकार के अनुसार, O
Level सर्टिफिकेट को डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (DCA) के समकक्ष माना गया है। राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे (NSQF) के तहत इसे Level
4
का दर्जा दिया गया है।
3. मुख्य विषय (Key
Subjects)
O Level में आप केवल टाइपिंग या बेसिक चलाना नहीं सीखते, बल्कि इसमें तकनीकी विषयों का समावेश है:
- IT Tools: कंप्यूटर फंडामेंटल्स और ऑफिस पैकेज (LibreOffice/MS Office)।
- Web Design: खुद की वेबसाइट बनाना सीखना (HTML,
CSS)।
- Programming: आधुनिक कोडिंग भाषा Python का ज्ञान।
- IoT (Internet of Things): यह भविष्य की तकनीक है, जिसमें मशीनों को इंटरनेट से जोड़ना सिखाया जाता है।
4. पंजीकरण के तरीके (Modes
of Entry)
आप इस कोर्स को दो तरह से कर सकते हैं:
- Direct (सीधे): आप बिना किसी कोचिंग के खुद NIELIT की वेबसाइट पर फॉर्म भरकर परीक्षा दे सकते हैं। यह सबसे सस्ता तरीका है।
- Through Institute: आप किसी NIELIT
मान्यता प्राप्त संस्थान में एडमिशन लेकर वहां से पढ़ाई कर सकते हैं।
5. सर्टिफिकेट की मान्यता
इसका सर्टिफिकेट पूरे भारत में मान्य है। चूंकि यह सीधे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आता है, इसलिए इसकी विश्वसनीयता किसी भी निजी (Private) संस्थान के सर्टिफिकेट से कहीं अधिक होती है।
2. कोर्स की संरचना (Course
Duration and Structure)
O Level कोर्स की कुल अवधि 1 वर्ष होती है, जिसे दो सेमेस्टर में बांटा गया है।
|
सेमेस्टर |
मॉड्यूल की संख्या |
मुख्य विषय |
|
सेमेस्टर 1 |
2 पेपर |
IT Tools, Web Designing |
|
सेमेस्टर 2 |
2 पेपर |
Python Programming, IoT
(Internet of Things) |
O Level कोर्स की संरचना को समझना बहुत ज़रूरी है क्योंकि यह एक व्यवस्थित (Systematic)
कोर्स है। यह केवल एक सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि एक डिप्लोमा स्तर का प्रोग्राम है जिसे दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है।
यहाँ इसकी विस्तृत संरचना (Structure) दी गई है:
1. कोर्स की अवधि (Duration)
- कुल समय: 1 वर्ष (1
Year)।
- सेमेस्टर: इस कोर्स को 2
सेमेस्टर
में विभाजित किया गया है (प्रत्येक सेमेस्टर 6 महीने का)।
- लचीलापन (Flexibility): यदि आप 'Direct
Candidate' के रूप में आवेदन करते हैं,
तो आप अपनी तैयारी के अनुसार एक बार में एक,
दो या चारों पेपर भी दे सकते हैं। अधिकतम 5 वर्षों के भीतर आपको यह कोर्स पूरा करना होता है।
2. मॉड्यूल और विषय (Modules
& Subjects)
O Level के नए सिलेबस (R5 -
Revision 5) के अनुसार, आपको कुल 4 थ्योरी पेपर, 4 प्रैक्टिकल और
1
प्रोजेक्ट
पूरा करना होता है।
प्रथम सेमेस्टर (First Semester)
- M1-R5: IT Tools and Network Basics
- इसमें कंप्यूटर फंडामेंटल्स,
ऑपरेटिंग सिस्टम (Windows/Linux), और Office
Automation (LibreOffice: Writer, Calc, Impress) सिखाया जाता है।
- M2-R5: Web Designing & Publishing
- यहाँ आप वेबसाइट बनाना सीखते हैं। इसमें HTML5, CSS3, JavaScript और Photo
Editor जैसे टूल्स शामिल हैं।
द्वितीय सेमेस्टर (Second Semester)
- M3-R5: Programming and Problem Solving
through Python
- यह सबसे महत्वपूर्ण मॉड्यूल है। इसमें आधुनिक प्रोग्रामिंग भाषा
Python के ज़रिए लॉजिक बिल्डिंग और कोडिंग सिखाई जाती है।
- M4-R5: Internet of Things and its
Applications (IoT)
- इसमें स्मार्ट डिवाइसेस,
सेंसर और 'Arduino' जैसे माइक्रोकंट्रोलर का उपयोग करके गैजेट्स बनाना सिखाया जाता है।
3. परीक्षा और मूल्यांकन (Examination
& Evaluation)
कोर्स को पास करने के लिए आपको तीन चरणों से गुज़रना होता है:
- Theory Exams (CBT): चारों मॉड्यूल के ऑनलाइन ऑब्जेक्टिव पेपर (100 MCQ प्रत्येक)।
- Practical Exams: प्रत्येक थ्योरी पेपर के साथ उसका एक संबंधित प्रैक्टिकल एग्जाम भी होता है। यानी 4 थ्योरी + 4
प्रैक्टिकल।
- Project Work: कोर्स के अंत में आपको एक छोटा प्रोजेक्ट जमा करना होता है। इसके बिना सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता।
4. ग्रेडिंग सिस्टम (Grading
System)
NIELIT अंकों के आधार पर सर्टिफिकेट पर ग्रेड देता है:
|
प्राप्त अंक (%) |
ग्रेड (Grade) |
|
85% से ऊपर |
S
(Super) |
|
75% – 84% |
A |
|
65% – 74% |
B |
|
55% – 64% |
C |
|
50% – 54% |
D |
|
50% से कम |
F
(Fail) |
नोट: पास होने के लिए थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में अलग-अलग न्यूनतम 33% और कुल मिलाकर (Average) 50% अंक लाना अनिवार्य है।
3. पात्रता और योग्यता (Eligibility
Criteria)
इस कोर्स को करने के लिए आपके पास नीचे दी गई योग्यताओं में से एक होनी चाहिए:
- 10+2 (Intermediate): किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास।
- ITI Certificate: 10वीं के बाद एक साल का ITI सर्टिफिकेट।
- Direct Entry: यदि आप 10वीं के बाद सीधे करना चाहते हैं,
तो आपके पास संबंधित क्षेत्र में 1 साल का अनुभव होना चाहिए।
O Level कोर्स की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें प्रवेश के नियम काफी लचीले हैं। चाहे आप अभी स्कूल से निकले हों या स्नातक (Graduate)
हों, आप अपनी स्थिति के अनुसार इसमें शामिल हो सकते हैं।
NIELIT के नियमों के अनुसार पात्रता को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:
1. शैक्षणिक योग्यता (Educational
Qualification)
O Level के लिए आपके पास निम्नलिखित में से कोई एक योग्यता होनी चाहिए:
- 12वीं पास (10+2): किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड (UP,
CBSE, ICSE आदि) से किसी भी स्ट्रीम (Art, Science, Commerce) में इंटरमीडिएट।
- ITI सर्टिफिकेट: 10वीं पास करने के बाद कम से कम 1
वर्ष का ITI सर्टिफिकेट कोर्स।
- पॉलीटेक्निक डिप्लोमा: 10वीं के बाद किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से सरकारी इंजीनियरिंग डिप्लोमा का दूसरा या तीसरा वर्ष कर रहे छात्र।
- स्नातक (Graduation): किसी भी विषय में डिग्री रखने वाले उम्मीदवार। (ग्रेजुएट्स के लिए यह कोर्स और भी आसान हो जाता है क्योंकि वे इसे 6 महीने की अवधि में भी पूरा करने का प्रयास कर सकते हैं)।
2. आवेदन के प्रकार के अनुसार शर्तें
आप इस कोर्स के लिए किस तरह से अप्लाई कर रहे हैं, उस आधार पर कुछ अनुभव की शर्तें जुड़ी हो सकती हैं:
|
आवेदन का प्रकार |
योग्यता (Qualification) |
अनुभव (Experience) |
|
संस्थान के माध्यम से (Institute Candidate) |
12वीं या ITI |
कोई अनुभव ज़रूरी नहीं |
|
सीधे आवेदन (Direct
Candidate) |
12वीं या ITI |
1 वर्ष का प्रासंगिक (Relevant)
कार्य अनुभव* |
|
स्नातक (Graduate) |
किसी भी विषय में डिग्री |
कोई अनुभव ज़रूरी नहीं (Direct भी कर सकते हैं) |
*नोट:
'Direct Candidate' के लिए अनुभव प्रमाण पत्र केवल एक स्व-घोषणा (Self-declaration) या किसी निजी/सरकारी संस्थान का साधारण अनुभव पत्र हो सकता है।
3. आयु सीमा (Age
Limit)
NIELIT O Level कोर्स करने के लिए कोई न्यूनतम या अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है। यदि आप योग्यता पूरी करते हैं,
तो आप किसी भी उम्र में इस कोर्स को कर सकते हैं।
4. क्या 10वीं के बाद सीधे ओ लेवल कर सकते हैं?
तकनीकी रूप से, 10वीं के बाद आपको कम से कम 1 साल का ITI सर्टिफिकेट या डिप्लोमा करना होगा। यदि आपने सिर्फ 10वीं पास की है, तो आप पहले CCC (Course on Computer Concepts) कर सकते हैं और फिर 12वीं के साथ O Level के लिए आवेदन कर सकते हैं।
4. पाठ्यक्रम (Syllabus
Details)
O Level में मुख्य रूप से 4 थ्योरी पेपर होते हैं:
- M1-R5: IT Tools and Network Basics (कंप्यूटर के बुनियादी सिद्धांत और ऑपरेटिंग सिस्टम)।
- M2-R5: Web Designing & Publishing
(HTML, CSS, JavaScript और Angular JS)।
- M3-R5: Programming and Problem Solving
through Python (आज की सबसे लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा)।
- M4-R5: Internet of Things and its
Applications (स्मार्ट डिवाइसेस और सेंसर टेक्नोलॉजी)।
इसके अलावा, आपको एक Practical
Exam और एक
Project
जमा करना होता है।
O Level का नया सिलेबस (Revision
R5.1)
आधुनिक इंडस्ट्री की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ज्ञान पर बहुत अधिक ज़ोर दिया गया है। 2026 की परीक्षाओं के लिए आपको कुल 4 मुख्य मॉड्यूल पढ़ने होते हैं।
यहाँ प्रत्येक मॉड्यूल का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. M1-R5: IT Tools and Network
Basics
यह मॉड्यूल कंप्यूटर की बुनियादी समझ विकसित करने के लिए है।
- Computer Basics: हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और इनपुट/आउटपुट डिवाइस।
- Operating System:
Windows और Linux (Ubuntu) की बुनियादी जानकारी।
- Word Processing:
LibreOffice Writer (MS Word की तरह) में डॉक्यूमेंट बनाना।
- Spreadsheet:
LibreOffice Calc (Excel की तरह) में डेटा मैनेजमेंट।
- Presentation:
LibreOffice Impress (PowerPoint की तरह) में स्लाइड बनाना।
- Networking: नेटवर्क के प्रकार (LAN,
WAN), टोपोलॉजी और डिजिटल वित्तीय उपकरण (Digital Finance)।
2. M2-R5: Web Designing &
Publishing
इसमें आपको वेबसाइट बनाना और उसे इंटरनेट पर लाइव करना सिखाया जाता है।
- HTML5 & CSS3: वेब पेज का स्ट्रक्चर और उसकी डिजाइनिंग।
- JavaScript: वेबसाइट को इंटरएक्टिव बनाना।
- Photo Editor: इमेज एडिटिंग के बेसिक टूल्स।
- Web Publishing: वेबसाइट को होस्ट (Publish)
करना।
- Angular JS: आधुनिक वेब फ्रेमवर्क का बुनियादी परिचय।
3. M3-R5: Programming and
Problem Solving through Python
यह कोर्स का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि पाइथन आज की सबसे लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा है।
- Algorithms & Flowcharts: समस्याओं को सुलझाने के लॉजिक बनाना।
- Python Basics: वेरिएबल्स, डेटा टाइप और लूप्स।
- Functions & Modules: कोड को दोबारा इस्तेमाल करने के तरीके।
- File Processing: फाइल्स को पढ़ना और लिखना।
- NumPy: डेटा एनालिसिस के लिए लाइब्रेरी का परिचय।
4. M4-R5: Internet of Things
(IoT) and its Applications
यह मॉड्यूल भविष्य की स्मार्ट तकनीक पर आधारित है।
- IoT Ecosystem: इंटरनेट से जुड़ी मशीनों के काम करने का तरीका।
- Sensors & Actuators: फिजिकल डेटा को डिजिटल बनाने वाले डिवाइसेस।
- Arduino: स्मार्ट गैजेट्स बनाने के लिए माइक्रोकंट्रोलर की प्रोग्रामिंग।
- Communication Protocols: डिवाइसेस के बीच बातचीत के नियम।
प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट (Practical & Project)
सिर्फ थ्योरी पास करना काफी नहीं है,
NIELIT ने अब Online
Practical परीक्षा अनिवार्य कर दी है।
- 4 Practicals: हर मॉड्यूल (M1
से M4) का अपना एक अलग प्रैक्टिकल एग्जाम होता है।
- Project Work: चारों पेपर पास करने के बाद (या कम से कम दो पेपर के बाद), आपको एक प्रोजेक्ट जमा करना होता है। यह प्रोजेक्ट आपके द्वारा सीखी गई किसी भी तकनीक (जैसे Python या Web Design) पर आधारित हो सकता है।
5. परीक्षा प्रणाली (Exam
Pattern)
NIELIT अब Online
CBT (Computer Based Test) आयोजित करता है।
- प्रत्येक पेपर 100 अंकों का होता है (सभी Objective/MCQ)।
- पास होने के लिए थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में न्यूनतम
50% अंक
लाना अनिवार्य है।
ओ लेवल (O Level) की परीक्षा प्रणाली को अब काफी आधुनिक बना दिया गया है। 2026 के नए नियमों के अनुसार, अब यह परीक्षा पूरी तरह से CBT
(Computer Based Test) यानी ऑनलाइन मोड में होती है।
यहाँ परीक्षा के पैटर्न और पास होने के नियमों का पूरा विवरण दिया गया है:
1. थ्योरी परीक्षा (Theory
Exam)
- प्रकार: वस्तुनिष्ठ (Objective/MCQs)।
- कुल प्रश्न: 100 प्रश्न (प्रत्येक मॉड्यूल के लिए)।
- समय: 120 मिनट (2
घंटे)।
- नेगेटिव मार्किंग: इसमें कोई Negative
Marking नहीं
होती है।
- माध्यम: आप परीक्षा हिंदी या अंग्रेजी किसी भी भाषा में दे सकते हैं।
2. प्रैक्टिकल परीक्षा (Practical
Exam)
अब हर थ्योरी पेपर के साथ उसका एक ऑनलाइन प्रैक्टिकल एग्जाम भी होता है।
- समय: 50 मिनट।
- अंक: 100
(80 अंक का लैब टास्क + 20 अंक का Viva-Voce)।
- विवरण: आपको कंप्यूटर पर टास्क करके दिखाना होता है। पाइथन और वेब डिजाइनिंग के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है।
3. वेटेज और पासिंग क्राइटेरिया (Weightage
& Passing Criteria)
सर्टिफिकेट पाने के लिए केवल परीक्षा देना काफी नहीं है, आपको Passing
Formula समझना होगा:
|
परीक्षा का प्रकार |
वेटेज (Weightage) |
न्यूनतम अंक (Minimum %) |
|
थ्योरी (Theory) |
60% |
33% |
|
प्रैक्टिकल (Practical) |
40% |
33% |
|
कुल योग (Aggregate) |
100% |
50% |
उदाहरण के लिए: यदि आपके थ्योरी में 40 अंक हैं और प्रैक्टिकल में 80, तो आपका कुल स्कोर होगा:
$(40
\times 0.6) + (80 \times 0.4) = 24 + 32 = 56\%$. आप पास माने जाएंगे। लेकिन यदि थ्योरी में आपके 33% से कम अंक हैं, तो आप फेल माने जाएंगे चाहे प्रैक्टिकल में कितने भी अंक हों।
4. प्रोजेक्ट (Project
Submission)
जब आप कम से कम दो पेपर पास कर लेते हैं, तो आप अपना प्रोजेक्ट जमा कर सकते हैं।
- प्रोजेक्ट के लिए कोई अलग से अंक या ग्रेड नहीं मिलता,
लेकिन इसे
'Satisifactory' रूप में पास करना अनिवार्य है।
- बिना प्रोजेक्ट जमा किए आपको फाइनल सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता।
6. O Level सर्टिफिकेट के फायदे
- सरकारी नौकरियां: उत्तर प्रदेश (UPPSC, UPSSSC), RO/ARO, और पुलिस भर्ती में O Level को अनिवार्य या प्राथमिकता दी जाती है।
- प्राइवेट सेक्टर: डेटा एंट्री ऑपरेटर,
वेब डिजाइनर और जूनियर प्रोग्रामर के रूप में करियर की शुरुआत।
- उच्च शिक्षा: इसके बाद आप
A Level (Advanced Diploma) कर सकते हैं जो MCA/B.Tech के समकक्ष माना जाता है।
O Level सर्टिफिकेट केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है,
बल्कि यह आपके करियर के लिए एक "Career
Accelerator" की तरह काम करता है। भारत में, विशेषकर सरकारी क्षेत्र में, इसकी मान्यता किसी भी अन्य निजी कंप्यूटर डिप्लोमा से कहीं अधिक है।
यहाँ O Level सर्टिफिकेट के प्रमुख फायदे दिए गए हैं:
1. सरकारी नौकरियों में अनिवार्य (Government
Job Opportunities)
भारत के कई राज्यों और केंद्र सरकार की भर्तियों में O Level को अनिवार्य योग्यता माना जाता है।
- UPPSC / UPSSSC: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की RO/ARO
(समीक्षा अधिकारी) भर्ती के लिए यह अनिवार्य है।
- Police Recruitment: कंप्यूटर ऑपरेटर और एएसआई (ASI
Clerk) के पदों के लिए O Level या इसके समकक्ष सर्टिफिकेट मांगा जाता है।
- State Secretariats: विभिन्न राज्यों के सचिवालयों में क्लर्क और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पदों पर O
Level धारकों को प्राथमिकता दी जाती है।
2. निजी क्षेत्र में करियर (Private
Sector Jobs)
यदि आप सरकारी नौकरी नहीं करना चाहते, तो भी यह सर्टिफिकेट आपको आईटी इंडस्ट्री में प्रवेश दिलाने में मदद करता है। आप निम्नलिखित भूमिकाओं में काम कर सकते हैं:
- Junior Programmer: पाइथन (Python)
सीखने के बाद आप कोडिंग में शुरुआत कर सकते हैं।
- Web Designer:
HTML और CSS के ज्ञान से आप फ्रीलांसिंग या कंपनियों के लिए वेबसाइट बना सकते हैं।
- Lab Assistant: स्कूलों और कॉलेजों के कंप्यूटर लैब में सहायक के रूप में।
- Office Automation Assistant: ऑफिस के डेटा और नेटवर्क को मैनेज करने के लिए।
3. उच्च शिक्षा के लिए आधार (Path
to Higher Education)
O Level करने के बाद आपके लिए उच्च स्तर के कोर्सेस के रास्ते खुल जाते हैं:
- आप सीधे
NIELIT
A Level (एडवांस डिप्लोमा) में प्रवेश ले सकते हैं,
जो ग्रेजुएशन/B.Tech (CS) के समकक्ष माना जाता है।
- यह MCA या अन्य तकनीकी डिग्री की तैयारी के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।
4. तकनीकी कौशल का विकास (Skill
Development)
O Level का पाठ्यक्रम आपको केवल "कंप्यूटर चलाना" नहीं सिखाता, बल्कि आपको भविष्य की तकनीकों से जोड़ता है:
- Problem Solving: प्रोग्रामिंग के जरिए सोचने की क्षमता बढ़ती है।
- IoT Knowledge: आप स्मार्ट डिवाइसेस के काम करने के तरीके को समझते हैं।
- Digital Literacy: बैंकिंग, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट का सही उपयोग करना सीखते हैं।
5. स्वरोजगार (Self-Employment)
सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद आप अपना खुद का Common
Service Center (CSC) खोल सकते हैं या एक छोटा कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा, वेब डिजाइनिंग के जरिए आप घर बैठे फ्रीलांसिंग प्रोजेक्ट्स भी ले सकते हैं।
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फायदा |
विवरण |
|
मान्यता |
भारत सरकार द्वारा प्रमाणित (MHRD मान्यता प्राप्त) |
|
लागत |
अन्य प्रोफेशनल कोर्सेस की तुलना में बहुत सस्ता |
|
वैधता |
आजीवन (Lifetime Validity) |
7. रजिस्ट्रेशन और फीस (Fee
Structure)
आप NIELIT के पोर्टल पर जाकर दो तरह से आवेदन कर सकते हैं:
- Direct Candidate: खुद से पढ़ाई करके (सस्ता विकल्प)।
- Institute Candidate: किसी मान्यता प्राप्त कोचिंग संस्थान के माध्यम से।
अनुमानित खर्च:
- रजिस्ट्रेशन फीस: ₹500
- परीक्षा फीस: ₹1000 प्रति पेपर (लगभग)
- प्रैक्टिकल फीस: ₹500
8. तैयारी कैसे करें?
(Tips for Success)
- NCERT/NIELIT बुक्स:
आधिकारिक पाठ्यक्रम का पालन करें।
- Previous Year Papers: पिछले वर्षों के प्रश्न हल करना सबसे ज़्यादा कारगर है।
- Practical Knowledge: कोडिंग (Python/HTML)
को सिर्फ रटें नहीं,
कंप्यूटर पर अभ्यास करें।
निष्कर्ष
O Level सर्टिफिकेट न केवल आपके बायोडाटा (Resume)
को मज़बूत बनाता है, बल्कि आपको तकनीकी रूप से सक्षम भी बनाता है। अगर आप सरकारी नौकरी की तलाश में हैं, तो यह आपके लिए एक 'Golden
Ticket' साबित हो सकता है।
